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I.P.C की महत्वपूर्ण धाराएं भाग दूसरा

Hello friends स्वागत हैं आपका मेरे इस आर्टिकल में इस आर्टिकल में मैं आपको बताऊंगा IPC की महत्वपूर्ण धाराएँ कौन कौन सी हैं

याद रहे इससे पहले मैंने एक भाग पब्लिश किया था Ipc की महत्वपूर्ण धाराओं का पढने के लिए यहाँ भाग 1 पर क्लिक करे

इस भाग में कुछ अन्य धाराओं के बारे में बताऊंगा जो पिछले भाग में नहीं बताई गई थी अगर पहला भाग नहीं पढ़ा हैं तो उसे जरुर पढ़े दरअसल पहला भाग post करने के बाद कई पाठको की प्रतिक्रिया आई की और भी सभी धाराओं के बारे में बताये इस लिए google जी की मदद से मैं यह दूसरा भाग आपके लिए लाया हूँ


धारा संख्या             विवरण या परिभाषा
आईपीसी धारा 1 - संहिता का नाम और उसके प्रवर्तन का विस्तार
आईपीसी धारा 2 - भारत के भीतर किए गए अपराधों का दण्ड
आईपीसी धारा 3 - भारत से परे किए गए किन्तु उसके भीतर विधि के अनुसार विचारणीय अफराधों का दण्ड
आईपीसी धारा 4 - राज्यक्षेत्रातीत अपराधों पर संहिता का विस्तार
आईपीसी धारा 5 - कुछ विधियों पर इस अधिनियम द्वारा प्रभाव न डाला जाना
आईपीसी धारा 6 - संहिता में की परिभाषाओं का अपवादों के अध्यधीन समझा जाना
आईपीसी धारा 7 - एक बार स्पष्टीकॄत पद का भाव
आईपीसी धारा 8 - लिंग
आईपीसी धारा 9 - वचन
आईपीसी धारा 10 - पुरुष। स्त्री
आईपीसी धारा 11 - व्यक्ति
आईपीसी धारा 12 - लोक
आईपीसी धारा 13 - क्वीन की परिभाषा
आईपीसी धारा 14 - सरकार का सेवक
आईपीसी धारा 15 - ब्रिटिश इण्डिया की परिभाषा
आईपीसी धारा 16 - गवर्नमेंट आफ इण्डिया की परिभाषा
आईपीसी धारा 17 - सरकार
आईपीसी धारा 18 - भारत
आईपीसी धारा 19 - न्यायाधीश
आईपीसी धारा 20 - न्यायालय
आईपीसी धारा 21 - लोक सेवक
आईपीसी धारा 22 - जंगम सम्पत्ति
आईपीसी धारा 23 - सदोष अभिलाभ
आईपीसी धारा 24 - बेईमानी से
आईपीसी धारा 25 - कपटपूर्वक
आईपीसी धारा 26 - विश्वास करने का कारण
आईपीसी धारा 27 - पत्नी, लिपिक या सेवक के कब्जे में सम्पत्ति
आईपीसी धारा 28 - कूटकरण
आईपीसी धारा 29 - दस्तावेज
आईपीसी धारा 30 - मूल्यवान प्रतिभूति
आईपीसी धारा 31 - बिल
आईपीसी धारा 32 - कार्यों का निर्देश करने वाले शब्दों के अन्तर्गत अवैध लोप आता है
आईपीसी धारा 33 - कार्य
आईपीसी धारा 34 - सामान्य आशय को अग्रसर करने में कई व्यक्तियों द्वारा किए गए कार्य
आईपीसी धारा 35 - जबकि ऐसा कार्य इस कारण आपराधिक है कि वह आपराधिक ज्ञान या आशय से किया गया है
आईपीसी धारा 36 - अंशत: कार्य द्वारा और अंशत: लोप द्वारा कारित परिणाम
आईपीसी धारा 37 - किसी अपराध को गठित करने वाले कई कार्यों में से किसी एक को करके सहयोग करना
आईपीसी धारा 38 - आपराधिक कार्य में संपॄक्त व्यक्ति विभिन्न अपराधों के दोषी हो सकेंगे
आईपीसी धारा 39 - स्वेच्छया
आईपीसी धारा 40 - अपराध
आईपीसी धारा 41 - विशेष विधि
आईपीसी धारा 42 - स्थानीय विधि
आईपीसी धारा 43 - अवैध
आईपीसी धारा 44 - क्षति
आईपीसी धारा 45 - जीवन
आईपीसी धारा 46 - मॄत्यु
आईपीसी धारा 47 - जीवजन्तु
आईपीसी धारा 48 - जलयान
आईपीसी धारा 49 - वर्ष या मास
आईपीसी धारा 50 - धारा
आईपीसी धारा 51 - शपथ
आईपीसी धारा 52 - सद्भावपूर्वक
आईपीसी धारा 53 - दण्ड
आईपीसी धारा 54 - मॄत्यु दण्डादेश का लघुकरण
आईपीसी धारा 55 - आजीवन कारावास के दण्डादेश का लघुकरण
आईपीसी धारा 56 - य़ूरोपियों तथा अमरीकियों को कठोरश्रम कारावास का दण्डादेश । दस वर्ष से अधिक किन्तु जो आजीवन कारावास से अधिक न हो, दण्डादेश के संबंध में परन्तुक
आईपीसी धारा 57 - दण्डावधियों की भिन्नें
आईपीसी धारा 58 - निर्वासन से दण्डादिष्ट अपराधियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए जब तक वे निर्वासित न कर दिए जाएं
आईपीसी धारा 59 - कारावास के बदले निर्वासनट
आईपीसी धारा 60 - दण्डादिष्ट कारावास के कतिपय मामलों में सम्पूर्ण कारावास या उसका कोई भाग कठिन या सादा हो सकेगा
आईपीसी धारा 61 - सम्पत्ति के समपहरण का दण्डादेश
आईपीसी धारा 62 - मॄत्यु, निर्वासन या कारावास से दण्डनीय अपराधियों की बाबत सम्पत्ति का समपहरण ।
आईपीसी धारा 63 - जुर्माने की रकम
आईपीसी धारा 64 - जुर्माना न देने पर कारावास का दण्डादेश
आईपीसी धारा 65 - जब कि कारावास और जुर्माना दोनों आदिष्ट किए जा सकते हैं, तब जुर्माना न देने पर कारावास की अवधि
आईपीसी धारा 66 - जुर्माना न देने पर किस भांति का कारावास दिया जाए
आईपीसी धारा 67 - जुर्माना न देने पर कारावास, जबकि अपराध केवल जुर्माने से दण्डनीय हो
आईपीसी धारा 68 - जुर्माना देने पर कारावास का पर्यवसान हो जाना
आईपीसी धारा 69 - जुर्माने के आनुपातिक भाग के दे दिए जाने की दशा में कारावास का पर्यवसान
आईपीसी धारा 70 - जुर्माने का छह वर्ष के भीतर या कारावास के दौरान में उद्ग्रहणीय होना । सम्पत्ति को दायित्व से मॄत्यु उन्मुक्त नहीं करती
आईपीसी धारा 71 - कई अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए दण्ड की अवधि
आईपीसी धारा 72 - कई अपराधों में से एक के दोषी व्यक्ति के लिए दण्ड जबकि निर्णय में यह कथित है कि यह संदेह है कि वह किस अपराध का दोषी है
आईपीसी धारा 73 - एकांत परिरोध
आईपीसी धारा 74 - एकांत परिरोध की अवधि
आईपीसी धारा 75 - पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात्् अध्याय 12 या अध्याय 17 के अधीन कतिपय अपराधों के लिए वर्धित दण्ड
आईपीसी धारा 76 - विधि द्वारा आबद्ध या तथ्य की भूल के कारण अपने आप के विधि द्वारा आबद्ध होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य
आईपीसी धारा 77 - न्यायिकतः कार्य करते हुए न्यायाधीश का कार्य
आईपीसी धारा 78 - न्यायालय के निर्णय या आदेश के अनुसरण में किया गया कार्य
आईपीसी धारा 79 - विधि द्वारा न्यायानुमत या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य
आईपीसी धारा 80 - विधिपूर्ण कार्य करने में दुर्घटना
आईपीसी धारा 81 - कार्य, जिससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, किंतु जो आपराधिक आशय के बिना और अन्य अपहानि के निवारण के लिए किया गया है
आईपीसी धारा 82 - सात वर्ष से कम आयु के शिशु का कार्य
आईपीसी धारा 83 - सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य
आईपीसी धारा 84 - विकॄतचित व्यक्ति का कार्य
आईपीसी धारा 85 - ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरुद्ध मत्तता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ है
आईपीसी धारा 86 - किसी व्यक्ति द्वारा, जो मत्तता में है, किया गया अपराध जिसमें विशेष आशय या ज्ञान का होना अपेक्षित है
आईपीसी धारा 87 - सम्मति से किया गया कार्य जिससे मॄत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय न हो और न उसकी संभाव्यता का ज्ञान हो
आईपीसी धारा 88 - किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सम्मति से सद््भावपूर्वक किया गया कार्य जिससे मॄत्यु कारित करने का आशय नहीं है
आईपीसी धारा 89 - संरक्षक द्वारा या उसकी सम्मति से शिशु या उन्मत्त व्यक्ति के फायदे के लिए सद््भावपूर्वक किया गया कार्य
आईपीसी धारा 90 - सम्मति, जिसके संबंध में यह ज्ञात हो कि वह भय या भ्रम के अधीन दी गई है
आईपीसी धारा 91 - ऐसे कार्यों का अपवर्जन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है
आईपीसी धारा 92 - सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद््भावपूर्वक किया गया कार्य
आईपीसी धारा 93 - सद््भावपूर्वक दी गई संसूचना
आईपीसी धारा 94 - वह कार्य जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है
आईपीसी धारा 95 - तुच्छ अपहानि कारित करने वाला कार्य
आईपीसी धारा 96 - प्राइवेट प्रतिरक्षा में की गई बातें
आईपीसी धारा 97 - शरीर तथा संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार
आईपीसी धारा 98 - ऐसे व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकॄतचित्त आदि हो
आईपीसी धारा 99 - कार्य, जिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है
आईपीसी धारा 100 - शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मॄत्यु कारित करने पर कब होता है
आईपीसी धारा 101 - कब ऐसे अधिकार का विस्तार मॄत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का होता है
आईपीसी धारा 102 - शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
आईपीसी धारा 103 - कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मॄत्यु कारित करने तक का होता है
आईपीसी धारा 104 - ऐसे अधिकार का विस्तार मॄत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का कब होता है
आईपीसी धारा 105 - सम्पत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
आईपीसी धारा 106 - घातक हमले के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जब कि निर्दोष व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है
आईपीसी धारा 107 - किसी बात का दुष्प्रेरण
आईपीसी धारा 108 - दुष्प्रेरक
आईपीसी धारा 109 - दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए, और जहां कि उसके दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं है
आईपीसी धारा 110 - दुष्रे्वरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति दुष्प्रेरक के आशय से भिन्न आशय से कार्य करता है
आईपीसी धारा 111 - दुष्प्रेरक का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है
आईपीसी धारा 112 - दुष्प्रेरक कब दुष्प्रेरित कार्य के लिए और किए गए कार्य के लिए आकलित दण्ड से दण्डनीय है
आईपीसी धारा 113 - दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो
आईपीसी धारा 114 - अपराध किए जाते समय दुष्प्रेरक की उपस्थिति
आईपीसी धारा 115 - मॄत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण--यदि अपराध नहीं किया जाता
आईपीसी धारा 116 - कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण--यदि अपराध न किया जाए
आईपीसी धारा 117 - लोक साधारण द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों द्वारा अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण
आईपीसी धारा 118 - मॄत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना
आईपीसी धारा 119 - किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है

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